2045 तक भारत में नए कैंसर मामलों की संख्या 15 लाख से बढ़कर 24.5 लाख सालाना होने का अनुमान; समय पर जांच से ही बचेंगी जिंदगियां

विश्व कैंसर दिवस 4 फरवरी को

नई दिल्ली | 3 फरवरी 2026

भारत में हर साल सामने आने वाले नए कैंसर मामलों की संख्या 2045 तक बढ़कर 24.5 लाख से अधिक होने का अनुमान है, जबकि वर्तमान में यह आंकड़ा 15 लाख के करीब है। ऐसे में कैंसर से निपटने की देश की रणनीति में समय से जांच और रोकथाम को केंद्र में रखना बेहद जरूरी है। यह बात इंडियन कैंसर सोसाइटी (ICS), दिल्ली ने मंगलवार को कही।
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब केंद्रीय बजट 2026–27 में कैंसर उपचार की पहुंच बढ़ाने के लिए कई अहम कदमों की घोषणा की गई है, जिनमें चुनिंदा कैंसर दवाओं पर कस्टम ड्यूटी में छूट और घरेलू बायोफार्मा उत्पादन को बढ़ावा देना शामिल है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बजट के इन कदमों का स्वागत किया, लेकिन साथ ही आगाह किया कि केवल उपचार पर ध्यान देना भारत में तेजी से बढ़ते कैंसर बोझ से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।


उपचार के साथ रोकथाम और शुरुआती पहचान पर भी समान जोर जरूरी
इंडियन कैंसर सोसाइटी (दिल्ली शाखा) ने इन मुद्दों को मंगलवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक मीडिया संवाद के दौरान प्रमुखता से उठाया। इस दौरान स्वास्थ्य विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और कैंसर से जूझ चुके लोगों ने भारत में कैंसर के उभरते रुझानों, मरीजों की जांच की व्यवस्था में मौजूद खामियों और बीमारी की रोकथाम की मजबूत रणनीतियों की जरूरत पर चर्चा की।
“2026 के बजट ने किफायती इलाज को कुछ हद तक आसान किया है, लेकिन आईसीएस का फोकस इस बात पर है कि मरीज उस स्थिति तक ही न पहुंचें जहां ऐसा महंगा इलाज ही उनका आखिरी सहारा बन जाए,” आईसीएस दिल्ली शाखा के एक प्रवक्ता ने कहा। उन्होंने बताया कि 1983 से दिल्ली शाखा सामुदायिक स्तर पर काम करते हुए नीतियों और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने में सक्रिय है।
इस मीडिया संवाद के दौरान ‘बायोफार्मा शक्ति’ ढांचे का प्रभावी उपयोग करने और सार्वजनिक–निजी भागीदारी को और मजबूत करने की अपील की गई, ताकि स्क्रीनिंग और डायग्नोस्टिक सुविधाएं उन वंचित आबादी तक पहुंच सकें, जिनके साथ आईसीएस पिछले 70 वर्षों से काम कर रही है।
मीडिया से बातचीत करते हुए श्रीमती ज्योत्सना गोविल, चेयरपर्सन, आईसीएस दिल्ली, ने कैंसर रोकथाम, मरीज सहायता और एडवोकेसी के क्षेत्र में संगठन की दशकों लंबी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मिथकों को तोड़ना, समय पर जांच को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक जानकारी को लोगों तक पहुंचाना बहुत जरूरी है।
मुख्य आंकड़े प्रस्तुत करते हुए डॉ. नितेश रोहतगी, सीनियर डायरेक्टर (ऑन्कोलॉजी), फोर्टिस मेमोरियल हॉस्पिटल ने भारत में कैंसर की घटनाओं और रुझानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने उम्र के अनुसार रोकथाम के उपाय, शुरुआती स्क्रीनिंग और नई डायग्नोस्टिक तकनीकों के महत्व पर जोर दिया, जो इलाज के परिणाम बेहतर बनाने और लागत कम करने में मदद कर सकती हैं।
डॉ. उर्वशी प्रसाद जो खुद एक कैंसर सर्वाइवर हैं और नीति आयोग की निदेशक रही हैं, ने नीतिगत और व्यवस्थागत चुनौतियों पर ध्यान दिलाया। उन्होंने कैंसर डेटा में खामियों, इलाज में क्षेत्रीय असमानताओं और वित्तीय बाधाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और कैंसर देखभाल में सतत सार्वजनिक निवेश की जरूरत पर बल दिया।
आईसीएस दिल्ली की सचिव और खुद कैंसर से उबर चुकी श्रीमती रेणुका प्रसाद ने एक कैंसर मरीज के अनुभव को साझा किया। उन्होंने कैंसर के भावनात्मक, शारीरिक और आर्थिक प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने आईसीएस दिल्ली की सामुदायिक पहल की भी जानकारी दी, जिनमें ‘प्रशांति’ नाम से चलाए जा रहे पुनर्वास केंद्र, बड़े स्तर पर चलाए जा रहे स्क्रीनिंग अभियान, ‘राइज अगेंस्ट कैंसर’ ऐप और बैंकिंग संस्थान एचडीएफसी के साथ सहयोग से चलाए जा रहे मरीज सहायता कार्यक्रम शामिल हैं।
पब्लिक हेल्थ कंसल्टेंट और पूर्व डब्ल्यूएचओ अधिकारी डॉ. मोनिका पुरी ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (universal health coverage) की अवधारणा के तहत कैंसर रोकथाम पर जोर दिया। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणालियों (into primary health systems) में रोकथाम, स्क्रीनिंग और निरंतर देखभाल को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही कहा कि वंचित आबादी तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है।

इंडियन कैंसर सोसाइटी (ICS), दिल्ली के बारे में

इंडियन कैंसर सोसाइटी, दिल्ली, कैंसर की रोकथाम, जल्दी पहचान, मरीजों की सहायता, पुनर्वास और एडवोकेसी के क्षेत्र में कार्य करती है। इस संदर्भ में वंचित समुदायों पर इसका विशेष ध्यान होता है। साक्ष्य-आधारित कार्यक्रमों और मानवीय दृष्टिकोण के जरिए आईसीएस कैंसर के बोझ को कम करने और मरीजों व उनके परिवारों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने का प्रयास करती है।

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