श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ का कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय स्मारक पहल के रूप में भारत के इतिहास में इसकी अनूठी भूमिका का जश्न मनाने के क्रम में यह आयोजन संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य नागरिकों, विशेषकर हमारे युवाओं और छात्र-छात्राओं को गीत की मूल क्रांतिकारी भावना से जोड़ना है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. बलराम पाणी, डीन ऑफ कॉलेजेज, दिल्ली विश्वविद्यालय उपस्थित रहे। उनके द्वारा राष्ट्रीय गीत उत्कीर्ण शिलापट्ट का डॉ ऋषिराज पाठक द्वारा मंत्रोच्चार गायन के साथ अनावरण भी किया गया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की प्रतिमा के माल्यार्पण और एन सी सी छात्राओं के द्वारा शानदार गार्ड ऑफ ऑनर के बाद कॉलेज ऑडिटोरियम में दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। प्राचार्या प्रो. नीलम गोयल और कार्यक्रम संयोजिका प्रो. मंजुला ग्रोवर के द्वारा मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि शासी निकाय की अध्यक्ष प्रो. सुदेशना मजूमदार का पौधा एवं अंगवस्त्र के साथ स्वागत किया गया। संगीत विभाग और संगीतिका सोसायटी की छात्राओं के द्वारा इस अवसर पर सरस्वती वंदना और दिल्ली विश्वविद्यालय के कुल गीत की अत्यंत सराहनीय प्रस्तुति की गई। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रोताओं द्वारा वंदे मातरम् का सामूहिक गायन भी किया गया। इसी क्रम में संयोजिका प्रो. मंजुला ग्रोवर द्वारा सभी उपस्थित श्रोताओं को सामूहिक रूप से स्वदेशी संकल्प की शपथ भी दिलाई गई।
अपने वक्तव्य में प्राचार्या ने मुख्य अतिथि और शासी निकाय की अध्यक्ष का स्वागत करते हुए राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को समस्त राष्ट्र को एकता के सूत्र में बांधने वाला बताया। यह गीत राष्ट्र को एक देवी, एक धरोहर की संकल्पना से जोड़ता है। यह मात्र एक स्लोगन या नारा नहीं है बल्कि मार्गदर्शक है जो लक्ष्य निर्माण और संधान के लिए प्रेरित करता है।
मुख्य अतिथि प्रो. पाणी ने अपने वक्तव्य में आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए बड़ी संख्या में उपस्थित छात्राओं की भरपूर सराहना की। राष्ट्रीय गीत के इतिहास को बताते हुए जीवनदात्री मां की संकल्पना को स्पष्ट किया। दमन और पराधीनता के बीच प्रतिरोध और राष्ट्रीय स्वाभिमान की भावना को प्रस्तुत करने के लिए इसका निर्माण किया गया। बंग भंग के दौरान राष्ट्रीय उद्घोष बना। श्याम कृष्ण वर्मा को इस अवसर पर याद करते हुए भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के विस्मृत नायकों के योगदान को पहचानने और पुनर्स्थापित करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सराहनीय भूमिका को भी रेखांकित किया। प्रतिबंधों, परिवर्तनों के एक लंबे संघर्ष गुजरते हुए हमारा राष्ट्रीय गीत प्रतिष्ठापित हुआ है।

कार्यक्रम के अंत में शासी निकाय की अध्यक्ष प्रो. मजूमदार ने वंदे मातरम् को वर्तमान पर्यावरणीय बोध के संदर्भ से भी जोड़ा और युवाओं को इसके मूल अर्थ को जानने का आग्रह किया। धन्यवाद ज्ञापित करते हुए प्राचार्या प्रो. नीलम गोयल और कार्यक्रम संयोजिका प्रो. मंजुला ग्रोवर को इस सुंदर और बेहद व्यवस्थित, अनुशासित कार्यक्रम के लिए सराहा और मुख्य अतिथि की गरिमामय उपस्थिति के लिए उनका धन्यवाद किया। कार्यक्रम संचालिका प्रो. शिवानी जॉर्ज को उनके सुंदर संचालन के लिए और उपस्थित शिक्षकों, अन्य कर्मचारियों के साथ ही बड़ी संख्या में उपस्थित छात्राओं को उनकी प्रतिभागिता के लिए धन्यवाद दिया। राष्ट्र गान के साथ ही कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।

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