
नई दिल्ली:
क्या मुँहासों (Acne) के इलाज के लिए बनाई गई दवा अब गंजेपन की समस्या में भी मदद कर सकती है? हालिया वैज्ञानिक शोध से पुरुषों में बाल झड़ने की समस्या, जिसे मेडिकल भाषा में एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया (Male Pattern Baldness) कहा जाता है, के इलाज को लेकर नई उम्मीद जगी है।
स्किनक्योर (SkinQure) क्लिनिक, नई दिल्ली के डर्मेटोलॉजिस्ट और हेयर रेस्टोरेशन विशेषज्ञ डॉ. बी. एल. जांगिड के अनुसार, हाल ही में किए गए दो बड़े फेज़-3 क्लिनिकल ट्रायल्स में क्लास्कोटेरोन (Clascoterone) नामक टॉपिकल दवा से उत्साहजनक नतीजे सामने आए हैं। यह दवा पहले ही मुँहासों के इलाज के लिए मंज़ूर की जा चुकी है।
डॉ. जांगिड कहते हैं, “अगर क्लास्कोटेरोन को बाल झड़ने के इलाज के लिए मंजूरी मिलती है, तो यह लगभग 30 वर्षों में टॉपिकल हेयर लॉस ट्रीटमेंट में सबसे बड़ी प्रगति होगी, खासकर उन पुरुषों के लिए जो मौजूदा ओरल दवाओं के साइड इफेक्ट्स को सहन नहीं कर पाते।”
पुरुषों में बाल क्यों झड़ते हैं?
मेल पैटर्न बाल्डनेस पुरुषों में बाल झड़ने का सबसे आम कारण है। यह समस्या मुख्य रूप से डीएचटी (Dihydrotestosterone) नामक पुरुष हार्मोन के कारण होती है, जो धीरे-धीरे बालों की जड़ों (हेयर फॉलिकल्स) को कमजोर कर देता है। समय के साथ बाल पतले और छोटे होने लगते हैं और अंततः उनका बढ़ना बंद हो जाता है। यह समस्या अक्सर 20–25 वर्ष की उम्र में ही शुरू हो सकती है, जिसकी पहचान माथे के दोनों ओर से हेयरलाइन पीछे जाना या सिर के बीच (क्राउन एरिया) में बाल पतले होना है। आंकड़ों के अनुसार, 50 वर्ष की उम्र तक लगभग 50% पुरुषों में आंशिक या गंभीर बाल झड़ने की समस्या देखी जाती है, जो आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।
क्लास्कोटेरोन कैसे काम करता है?
डॉ. जांगिड बताते हैं कि मौजूदा ज्यादातर इलाज या तो शरीर में हार्मोन के स्तर को कम करते हैं या अप्रत्यक्ष रूप से बालों की ग्रोथ को बढ़ाते हैं। इसके विपरीत, क्लास्कोटेरोन एक टॉपिकल दवा है, जिसे सीधे स्कैल्प पर लगाया जाता है।यह दवा शरीर में हार्मोन के स्तर को बदले बिना, स्कैल्प पर मौजूद एंड्रोजन रिसेप्टर्स को ब्लॉक करती है, जिससे डीएचटी बालों की जड़ों को नुकसान नहीं पहुँचा पाता।डॉ. जांगिड के अनुसार, “क्लास्कोटेरोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी टार्गेटेड एक्शन है। यह वहीं काम करती है जहाँ समस्या शुरू होती है, और इससे पूरे शरीर पर हार्मोनल साइड इफेक्ट्स होने की संभावना कम रहती है।”
रिसर्च में क्या सामने आया?
रिसर्च के अनुसार, फेज़ III ट्रायल्स में क्लास्कोटेरोन का उपयोग करने वाले पुरुषों में प्लेसबो (बिना दवा वाला उपचार) की तुलना में बालों की ग्रोथ में स्पष्ट रूप से बेहतर परिणाम देखे गए। इससे संकेत मिलता है कि यह दवा स्कैल्प लेवल पर पुरुष हार्मोन के प्रभाव को प्रभावी ढंग से रोक सकती है और बालों की जड़ों की सुरक्षा कर सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार बालों की सटीक संख्या, कितने मरीजों में सुधार हुआ और लंबे समय के नतीजों से जुड़ा विस्तृत डेटा अभी सामने आना बाकी है।डॉ. जांगिड के अनुसार, यह उपचार खासतौर पर उन पुरुषों के लिए उपयोगी हो सकता है जो बाल झड़ने की शुरुआती या मध्यम अवस्था में हैं, जिन्हें ओरल दवाओं से साइड इफेक्ट्स होते हैं या जो नॉन-इनवेसिव और टॉपिकल ट्रीटमेंट विकल्प तलाश रहे हैं। फिलहाल यह दवा भारत में बाल झड़ने के इलाज के लिए स्वीकृत नहीं है और रेगुलेटरी अप्रूवल प्रक्रिया में है।
डॉ. जांगिड कहते हैं, “हालाँकि क्लास्कोटेरोन अभी मौजूदा हेयर लॉस ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं है, लेकिन यह भविष्य के लिए एक वैज्ञानिक रूप से उन्नत और आशाजनक समाधान जरूर है। किसी भी हेयर लॉस ट्रीटमेंट को शुरू करने या बदलने से पहले मरीजों को योग्य डर्मेटोलॉजिस्ट या हेयर ट्रांसप्लांट सर्जन से सलाह जरूर लेनी चाहिए।”

