क्यूअर. एआई की एआई तकनीक से फेफड़ों के कैंसर की शुरुआती पहचान को नई मजबूती

फेफड़ों का कैंसर आज भी दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण बना हुआ है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि अधिकतर मामलों का पता तब चलता है, जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कैंसर का पता शुरू में चल जाए, तो मरीज की जान बचने और लंबा जीवन जीने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। इसी दिशा में क्यूअर. एआई (Qure.ai) की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित समाधान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

क्यूअर. एआई के फाउंडिंग मेंबर और चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर अंकित मोदी के अनुसार, “रेडियोलॉजी वर्कफ्लो में उन्नत एआई को एकीकृत कर क्यूअर. एआई फेफड़ों की गांठों (लंग नोड्यूल्स) की तेज और अधिक सटीक पहचान संभव बना रहा है, जिससे शुरुआती जांच का तरीका पूरी तरह बदल रहा है।”

एआई के जरिए शुरुआती पहचान को बढ़ावा

क्यूअर. एआई के एआई पावर्ड प्लेटफॉर्म-qXR, qCT और q Track-क्लिनिशियनों को फेफड़ों की गांठों की पहचान अधिक तेजी और सटीकता से करने में मदद कर रहे हैं। अब तक कंपनी की एआई तकनीक दुनिया भर में 50 लाख से अधिक चेस्ट एक्स-रे को प्रोसेस कर चुकी है। भारत में 1,200 से ज्यादा क्लिनिकल साइट्स पर इन टूल्स ने उन दस में से नौ नोड्यूल्स की पहचान की है, जिन्हें पहले नजरअंदाज कर दिया गया था। इससे मिस्ड डिटेक्शन में करीब 46 प्रतिशत की कमी आई है।

इन समाधानों की खास बात यह है कि यह ऐसे एक्स-रे में भी आकस्मिक नोड्यूल्स को पहचान सकते हैं, जो किसी अन्य बीमारी की जांच के लिए किए गए हों। इससे ऑन्कोलॉजी और नॉन-ऑन्कोलॉजी दोनों सेटअप में शुरुआती पहचान का दायरा बढ़ता है।

qXR: शुरुआती जांच का सशक्त माध्यम

qXR, जो व्यापक चेस्ट एक्स-रे विश्लेषण के लिए एआई समाधान है, लगभग तुरंत प्री-रीड सपोर्ट देता है। यह पारंपरिक रिपोर्टिंग से आगे बढ़कर उन विभागों में भी कैंसर से जुड़े संकेत पहचानता है, जहां आमतौर पर इसकी जांच नहीं होती। इसका क्लिनिकली वैलिडेटेड और पेटेंटेड लंग नोड्यूल मैलिग्नेंसी (LNM) रिस्क स्कोर फॉल्स पॉजिटिव को कम करता है और सही जोखिम वर्गीकरण में मदद करता है।

QCT और q Track से सटीकता व समन्वय

qCT के जरिए नोड्यूल्स की रिपोर्टिंग 46 प्रतिशत तक तेज हुई है, जबकि मैलिग्नेंसी रिस्क आकलन में 24 प्रतिशत का सुधार देखा गया है। वहीं q Track प्लेटफॉर्म मरीजों की ट्रैकिंग, स्मार्ट अलर्ट और फॉलो-अप को आसान बनाता है, जिससे कोई भी हाई रिस्क केस छूट न जाए।

भविष्य की दिशा

एफडीए-क्लियर उत्पादों और व्यापक क्लिनिकल प्रभाव के साथ क्यूअर. एआई फेफड़ों के कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए एक नया वैश्विक मानक स्थापित कर रहा है। एआई आधारित इस समग्र दृष्टिकोण से हर चेस्ट एक्स-रे अब शुरुआती कैंसर पहचान का एक अवसर बनता जा रहा है, जिससे समय पर इलाज और बेहतर जीवन-रक्षा संभव हो रही है।

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