वेस्ट अफ्रीका की एक युवा महिला, जो स्मोक नहीं करती थीं, का एडवांस स्टेज लंग कैंसर का शारदा केयर – हेल्थसिटी में सफल इलाज

  • लंग कैंसर का एक प्रकार, एडेनोकार्सिनोमा, अब नॉन-स्मोकर्स और युवाओं में भी बढ़ते प्रदूषण, पारिवारिक कारणों और जीवनशैली की वजह से तेजी से देखा जा रहा है
  • कैंसर के आक्रामक रूप के बावजूद, सही समय पर जांच और योजना बनाकर किए गए इलाज (कीमो और रेडिएशन) से ट्यूमर लगभग पूरी तरह से खत्म हो गया

ग्रेटर नोएडा, 31 जुलाई 2025: हर साल 1 अगस्त को वर्ल्ड लंग कैंसर डे हमें इस बीमारी के बढ़ते मामलों और समय रहते जांच व जागरूकता की अहमियत की याद दिलाता है। इस मौके पर ग्रेटर नोएडा के प्रमुख अस्पताल शारदा केयर – हेल्थसिटी ने एक अंतरराष्ट्रीय मरीज के सफल इलाज की मिसाल पेश की। बुर्किना फासो (वेस्ट अफ्रीका) से आई 38 वर्षीय महिला, जो धूम्रपान नहीं करती थीं, को लंग कैंसर के एक आक्रामक और एडवांस स्टेज के रूप (एडेनोकार्सिनोमा) से जूझना पड़ रहा था। अपने देश में उन्हें न सही जांच मिल पाई और न ही कोई इलाज। भारत पहुंचने के बाद उन्होंने शारदा केयर – हेल्थसिटी में इलाज शुरू कराया, जहां उनके लिए विशेष रूप से एक पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान तैयार किया गया।

इलाज की शुरुआत में वह इतनी कमजोर थीं कि चलने-फिरने में भी कठिनाई हो रही थी और सांस लेने में बहुत परेशानी थी। शारदा में की गई जांच में सीने के बीच वाले हिस्से (मिड चेस्ट) में एक गांठ का पता चला। बाद में पूरे शरीर की स्कैनिंग (PET स्कैन) से पता चला कि उनके फेफड़े के ऊपरी बाएं हिस्से में कैंसर तेजी से फैल रहा है। बायोप्सी से पुष्टि हुई कि उन्हें एडेनोकार्सिनोमा है – एक ऐसा कैंसर जो अब नॉन-स्मोकिंग महिलाओं और युवाओं में भी बढ़ रहा है। हालत गंभीर थी, इसलिए अस्पताल की विशेषज्ञ टीम (मल्टीडिसिप्लिनरी ट्यूमर बोर्ड) ने मिलकर इलाज की योजना बनाई जिसमें हर हफ्ते कीमोथेरेपी (Gemcitabine और Carboplatin दवाओं से) और साथ ही रेडिएशन दिया गया।

डॉ. अनिल ठकवानी, डायरेक्टर – क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी, शारदा केयर – हेल्थसिटी, ने कहा: “पहले लंग कैंसर को बूढ़े और स्मोक करने वालों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह 30 की उम्र पार कर चुके युवाओं और महिलाओं में भी तेजी से देखने को मिल रहा है, चाहे वे स्मोक करें या नहीं। इस मरीज का मामला खासतौर पर इसलिए जटिल था क्योंकि वह जवान थीं, स्मोक नहीं करती थीं, और फिर भी कैंसर तेजी से बढ़ गया था। इसके अलावा, ट्यूमर की जगह भी नाजुक हिस्से में थी – दिल और मुख्य नसों के पास – जिससे जांच और इलाज दोनों ही और चुनौतीपूर्ण हो गए। बहुत से मरीज शुरू की हल्की तकलीफों को नजरअंदाज कर देते हैं या गलत इलाज करा बैठते हैं।”

“हमने Gemcitabine और Carboplatin का इस्तेमाल किया जो कि एक पारंपरिक लेकिन कारगर इलाज है। साथ ही रेडिएशन भी साथ में दिया गया ताकि असर और पक्का हो। मरीज ने इलाज को बहुत अच्छे से झेला और तीन महीने के अंदर ही उसकी सारी मुख्य तकलीफें खत्म हो गईं और स्कैन में दिखा कि कैंसर लगभग गायब हो चुका है। इस केस ने फिर से साबित किया कि समय पर और सही जांच व इलाज से कितनी जानें बच सकती हैं – खासकर जब मरीज सामान्य ‘जोखिम वाले प्रोफाइल’ में न आएं। आगे का इलाज अब इम्यूनोथेरेपी, कीमो और टारगेटेड थेरेपी के जरिए होगा, जो शरीर के जीन टेस्ट पर आधारित होगा।”

श्री ऋषभ गुप्ता, वाइस प्रेसिडेंट, शारदा केयर – हेल्थसिटी, ने कहा: “शारदा में हम सिर्फ इलाज नहीं, संपूर्ण देखभाल का वादा करते हैं। इस केस ने दिखा दिया कि जब इलाज को व्यक्तिगत बनाया जाए और मरीज के हिसाब से तय किया जाए, तो कितने अच्छे नतीजे मिल सकते हैं – वो भी एक ऐसी महिला के लिए जो एकदम दूसरे महाद्वीप से आई थीं। हमें गर्व है कि हम ऐसे मरीजों की जिंदगी में बदलाव ला पा रहे हैं। हम बेहतरीन जांच सुविधाएं, अनुभवी डॉक्टर और समग्र इलाज का तरीका अपनाकर मरीजों को बेहतर जीवन दे रहे हैं।”

मरीज हामा सिसे ने भावुक होकर कहा: “मुझे सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही थी… लेकिन अब मुझे लग रहा है जैसे मुझे दूसरी जिंदगी मिल गई हो। जब मैं भारत आई, तो डर तो था, लेकिन यहां की टीम ने हर बात समझाई, मेरा हौसला बढ़ाया और मुझे लड़ने की ताकत दी। मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी कि मुझे कैंसर हो सकता है – क्योंकि मैंने कभी स्मोक भी नहीं किया। अब मैं पूरी तरह ठीक महसूस कर रही हूं और इसके लिए मैं शारदा की टीम की दिल से आभारी हूं।”

शारदा केयर – हेल्थसिटी में आधुनिक जांच सुविधाएं, एडवांस रेडिएशन मशीनें और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मौजूद है जो हर मरीज को उसके अनुसार व्यक्तिगत और पूरा इलाज देने में भरोसा रखती है। अंतरराष्ट्रीय मरीजों की बढ़ती संख्या के साथ, अस्पताल कैंसर इलाज के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नई मिसाल बना रहा है।

रिपोर्र -शिव शंकर -open voice

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